श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.13

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

स एव सा स सैवास्ति वंशी तत्प्रेमरूपिका।

श्रीकृष्णनखचन्द्रालिसंगाच्चन्द्रावली स्मृता॥ १३

sa eva sā sa saivāsti vaṃśī tatpremarūpikā|

śrīkṛṣṇanakhacandrālisaṃgāccandrāvalī smṛtā|| 13

अर्थ

श्रीकृष्ण ही राधा हैं और राधा ही श्रीकृष्ण हैं। उन दोनोंका प्रेम ही वंशी है। तथा राधाकी प्यारी सखी चन्द्रावली भी श्रीकृष्ण-चरणोंके नखरूपी चन्द्रमाओंकी सेवामें आसक्त रहनेके कारण ही ‘चन्द्रावली’ नामसे कही जाती है॥ १३॥

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