श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.14

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

रूपान्तरमगृह्णाना तयोः सेवातिलालसा।

रुक्मिण्यादिसमावेशो मयात्रैव विलोकितः॥ १४

rūpāntaramagṛhṇānā tayoḥ sevātilālasā|

rukmiṇyādisamāveśo mayātraiva vilokitaḥ|| 14

अर्थ

श्रीराधा और श्रीकृष्णकी सेवामें उसकी बड़ी लालसा, बड़ी लगन है; इसीलिये वह कोई दूसरा स्वरूप धारण नहीं करती। मैंने यहीं श्रीराधामें ही रुक्मिणी आदिका समावेश देखा है॥ १४॥

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