श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.15

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

युष्माकमपि कृष्णेन विरहो नैव सर्वतः।

किन्तु एवं न जानीथ तस्माद् व्याकुलतामिताः॥ १५

yuṣmākamapi kṛṣṇena viraho naiva sarvataḥ|

kintu evaṃ na jānītha tasmād vyākulatāmitāḥ|| 15

अर्थ

तुमलोगोंका भी सर्वांशमें श्रीकृष्णके साथ वियोग नहीं हुआ है, किन्तु तुम इस रहस्यको इस रूपमें जानती नहीं हो, इसीलिये इतनी व्याकुल हो रही हो॥ १५॥

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