श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.22

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

साधनभूमिर्बदरी व्रजता कृष्णेन मन्त्रिणे प्रोक्ता।

तत्रास्ते स तु साक्षात्तद्वयुनं ग्राहयँल्लोकान्॥ २२

sādhanabhūmirbadarī vrajatā kṛṣṇena mantriṇe proktā|

tatrāste sa tu sākṣāttadvayunaṃ grāhayam̐llokān|| 22

अर्थ

‘‘जब भगवान् श्रीकृष्ण अपने परमधामको पधारने लगे, तब उन्होंने अपने मन्त्री उद्धवसे कहा—‘उद्धव! साधना करनेकी भूमि है बदरिकाश्रम, अतः अपनी साधना पूर्ण करनेके लिये तुम वहीं जाओ।’ भगवान्‌की इस आज्ञाके अनुसार उद्धवजी इस समय अपने साक्षात् स्वरूपसे बदरिकाश्रममें विराजमान हैं और वहाँ जानेवाले जिज्ञासु लोगोंको भगवान्‌के बताये हुए ज्ञानका उपदेश करते रहते हैं॥ २२॥✎ 1790

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1790 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: श्रीकृष्ण-चन्द्रकी → श्रीकृष्णचन्द्रकी

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