phalamiha tirohitaṃ sattadihedānīṃ sa uddhavo'lakṣyaḥ|| 23
अर्थ
साधनकी फलरूपा भूमि है—व्रजभूमि; इसे भी इसके रहस्योंसहित भगवान्ने पहले ही उद्धवको दे दिया था। किन्तु वह फलभूमि यहाँसे भगवान्के अन्तर्धान होनेके साथ ही स्थूल दृष्टिसे परे जा चुकी है; इसीलिये इस समय यहाँ उद्धव प्रत्यक्ष दिखायी नहीं पड़ते॥ २३॥✎ 1790
फलभूमिर्व्रजभूमिर्दत्ता तस्मै पुरैव सरहस्यम्।
फलमिह तिरोहितं सत्तदिहेदानीं स उद्धवोऽलक्ष्यः॥ २३
साधनकी फलरूपा भूमि है—व्रजभूमि; इसे भी इसके रहस्योंसहित भगवान्ने पहले ही उद्धवको दे दिया था। किन्तु वह फलभूमि यहाँसे भगवान्के अन्तर्धान होनेके साथ ही स्थूल दृष्टिसे परे जा चुकी है; इसीलिये इस समय यहाँ उद्धव प्रत्यक्ष दिखायी नहीं पड़ते॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 991) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/2/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)