श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.26

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

वीणावेणुमृदङ्गैः कीर्तनकाव्यादिसरससंगीतैः।

उत्सव आरब्धव्यो हरिरतलोकान् समानाय्य॥ २६

vīṇāveṇumṛdaṅgaiḥ kīrtanakāvyādisarasasaṃgītaiḥ|

utsava ārabdhavyo hariratalokān samānāyya|| 26

अर्थ

भगवद्भक्तोंकी मण्डली एकत्र करके वीणा, वेणु और मृदंग आदि बाजोंके साथ भगवान्‌के नाम और लीलाओंके कीर्तन, भगवत्सम्बन्धी काव्य-कथाओंके श्रवण तथा भगवद्गुण-गानसे युक्त सरस संगीतोंद्वारा महान् उत्सव आरम्भ करो॥ २६॥

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