श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.27

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तत्रोद्धवावलोको भविता नियतं महोत्सवे वितते।

यौष्माकीणामभिमतसिद्धिं सविता स एव सवितानाम्॥ २७

tatroddhavāvaloko bhavitā niyataṃ mahotsave vitate|

yauṣmākīṇāmabhimatasiddhiṃ savitā sa eva savitānām|| 27

अर्थ

इस प्रकार जब उस महान् उत्सवका विस्तार होगा, तब निश्‍चय है कि वहाँ उद्धवजीका दर्शन मिलेगा। वे ही भलीभाँति तुम सब लोगोंके मनोरथ पूर्ण करेंगे’’॥ २७॥

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