इस पवित्र भारतवर्षमें मनुष्यका जन्म पाकर भी जिन लोगोंने पापके अधीन होकर श्रीमद्भागवत नहीं सुना, उन्होंने मानो अपने ही हाथों अपनी हत्या कर ली॥ १४॥
भारते मानवं जन्म प्राप्य भागवतं न यैः।
श्रुतं पापपराधीनैरात्मघातस्तु तैः कृतः॥ १४
इस पवित्र भारतवर्षमें मनुष्यका जन्म पाकर भी जिन लोगोंने पापके अधीन होकर श्रीमद्भागवत नहीं सुना, उन्होंने मानो अपने ही हाथों अपनी हत्या कर ली॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 995) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/14/