श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.17

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

योषितामपरेषां च सर्ववांछितपूरणम्।

अतो भागवतं नित्यं को न सेवेत भाग्यवान्॥ १७

yoṣitāmapareṣāṃ ca sarvavāṃchitapūraṇam|

ato bhāgavataṃ nityaṃ ko na seveta bhāgyavān|| 17

अर्थ

स्त्रियों तथा अन्त्यज आदि अन्य लोगोंकी भी इच्छा श्रीमद्भागवतसे पूर्ण होती है; अतः कौन ऐसा भाग्यवान् पुरुष है, जो श्रीमद्भागवतका नित्य ही सेवन न करेगा॥ १७॥

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