॥ श्रीहरिः ॥
सांख्यायनप्रसादाप्तं श्रीमद्भागवतं पुरा।
बृहस्पतिर्दत्तवान् मे तेनाहं कृष्णवल्लभः॥ १९
sāṃkhyāyanaprasādāptaṃ śrīmadbhāgavataṃ purā|
bṛhaspatirdattavān me tenāhaṃ kṛṣṇavallabhaḥ|| 19
अर्थ
पूर्वकालमें सांख्यायनकी कृपासे श्रीमद्भागवत बृहस्पतिजीको मिला और बृहस्पतिजीने मुझे दिया; इसीसे मैं श्रीकृष्णका प्रियतम सखा हो सका हूँ॥ १९॥
सांख्यायनप्रसादाप्तं श्रीमद्भागवतं पुरा।
बृहस्पतिर्दत्तवान् मे तेनाहं कृष्णवल्लभः॥ १९
पूर्वकालमें सांख्यायनकी कृपासे श्रीमद्भागवत बृहस्पतिजीको मिला और बृहस्पतिजीने मुझे दिया; इसीसे मैं श्रीकृष्णका प्रियतम सखा हो सका हूँ॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 995) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/19/