श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

बृहस्पतिरुवाच

यदा तु भगवांस्तस्मै श्रीमद्भागवतं पुरा।

उपदिश्याब्रवीद् ब्रह्मन् सेवस्वैनत् स्वसिद्धये॥ २५

yadā tu bhagavāṃstasmai śrīmadbhāgavataṃ purā|

upadiśyābravīd brahman sevasvainat svasiddhaye|| 25

अर्थ

बृहस्पतिजी कहते हैं—जब ब्रह्माजीने ऐसी प्रार्थना की, तब पूर्वकालमें भगवान्‌ने उन्हें श्रीमद्भागवतका उपदेश देकर कहा—‘ब्रह्मन्! तुम अपने मनोरथकी सिद्धिके लिये सदा ही इसका सेवन करते रहो’॥ २५॥

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