श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.68

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तस्मिन्‍नास्वाद्यमाने तु सच्चिदानन्दरूपिणी।

प्रचकाशे हरेर्लीला सर्वतः कृष्ण एव च॥ ६८

tasminnāsvādyamāne tu saccidānandarūpiṇī|

pracakāśe harerlīlā sarvataḥ kṛṣṇa eva ca|| 68

अर्थ

उस रसका आस्वादन करते समय प्रेमी श्रोताओंकी दृष्टिमें सब ओर भगवान्‌की सच्चिदानन्दमयी लीला प्रकाशित हो गयी और सर्वत्र श्रीकृष्णचन्द्रका साक्षात्कार होने लगा॥ ६८॥

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