श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.8

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अवतारेऽत्र कृष्णेन योगमायातिभाविताः।

तद्बलेनात्मविस्मृत्या सीदन्त्येते न संशयः॥ ८

avatāre'tra kṛṣṇena yogamāyātibhāvitāḥ|

tadbalenātmavismṛtyā sīdantyete na saṃśayaḥ|| 8

अर्थ

इस अवतारमें भगवान् श्रीकृष्णने इन सबको अपनी योगमायासे अभिभूत कर लिया है, उसीके प्रभावसे ये अपने स्वरूपको भूल गये हैं और इसी कारण सदा दुःखी रहते हैं। यह बात निस्सन्देह ऐसी ही है॥ ८॥

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