इस अवतारमें भगवान् श्रीकृष्णने इन सबको अपनी योगमायासे अभिभूत कर लिया है, उसीके प्रभावसे ये अपने स्वरूपको भूल गये हैं और इसी कारण सदा दुःखी रहते हैं। यह बात निस्सन्देह ऐसी ही है॥ ८॥
अवतारेऽत्र कृष्णेन योगमायातिभाविताः।
तद्बलेनात्मविस्मृत्या सीदन्त्येते न संशयः॥ ८
इस अवतारमें भगवान् श्रीकृष्णने इन सबको अपनी योगमायासे अभिभूत कर लिया है, उसीके प्रभावसे ये अपने स्वरूपको भूल गये हैं और इसी कारण सदा दुःखी रहते हैं। यह बात निस्सन्देह ऐसी ही है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 994) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/8/