श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.9

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ऋते कृष्णप्रकाशं तु स्वात्मबोधो न कस्यचित्।

तत्प्रकाशस्तु जीवानां मायया पिहितः सदा॥ ९

ṛte kṛṣṇaprakāśaṃ tu svātmabodho na kasyacit|

tatprakāśastu jīvānāṃ māyayā pihitaḥ sadā|| 9

अर्थ

श्रीकृष्णका प्रकाश प्राप्त हुए बिना किसीको भी अपने स्वरूपका बोध नहीं हो सकता। जीवोंके अन्तः-करणमें जो श्रीकृष्णतत्त्वका प्रकाश है, उसपर सदा मायाका पर्दा पड़ा रहता है॥ ९॥

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