ये कुछ थोड़े-से भेद यहाँ बताये गये। इनके अतिरिक्त भी प्रवर-अवर दोनों प्रकारके श्रोताओंके ‘भ्रमर’ और ‘गदहा’ आदि बहुत-से भेद हैं,’ इन सब भेदोंको उन-उन श्रोताओंके स्वाभाविक आचार-व्यवहारोंसे परखना चाहिये॥ २०॥
अन्येऽपि बहवो भेदा द्वयोर्भृंगखरादयः।
विज्ञेयास्तत्तदाचारैस्तत्तत्प्रकृतिसम्भवैः ॥ २०
ये कुछ थोड़े-से भेद यहाँ बताये गये। इनके अतिरिक्त भी प्रवर-अवर दोनों प्रकारके श्रोताओंके ‘भ्रमर’ और ‘गदहा’ आदि बहुत-से भेद हैं,’ इन सब भेदोंको उन-उन श्रोताओंके स्वाभाविक आचार-व्यवहारोंसे परखना चाहिये॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1004) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/20/