दूध या खीरका मौन भोजन करे। नित्य ब्रह्मचर्यका पालन और भूमिपर शयन करे, क्रोध और लोभ आदिको त्याग दे॥ ४४॥✎ 1793
पयसा वा हविष्येण मौनं भोजनमाचरेत्।
ब्रह्मचर्यमधःसुप्तिं क्रोधलोभादिवर्जनम्॥ ४४
दूध या खीरका मौन भोजन करे। नित्य ब्रह्मचर्यका पालन और भूमिपर शयन करे, क्रोध और लोभ आदिको त्याग दे॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1007) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/44/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)