श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.44

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

पयसा वा हविष्येण मौनं भोजनमाचरेत्।

ब्रह्मचर्यमधःसुप्तिं क्रोधलोभादिवर्जनम्॥ ४४

payasā vā haviṣyeṇa maunaṃ bhojanamācaret|

brahmacaryamadhaḥsuptiṃ krodhalobhādivarjanam|| 44

अर्थ

दूध या खीरका मौन भोजन करे। नित्य ब्रह्मचर्यका पालन और भूमिपर शयन करे, क्रोध और लोभ आदिको त्याग दे॥ ४४॥✎ 1793

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1793 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रसन्‍नता-पूर्वक → प्रसन्‍नतापूर्वक

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