श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.5

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

सम्पदः क्रतवो लोका महिषी भ्रातरो मही।

जम्बूद्वीपाधिपत्यं च यशश्‍च त्रिदिवं गतम्॥ ५

sampadaḥ kratavo lokā mahiṣī bhrātaro mahī|

jambūdvīpādhipatyaṃ ca yaśaśca tridivaṃ gatam|| 5

अर्थ

शौनकादि ऋषियो! उनके पास अतुल सम्पत्ति थी, उन्होंने बड़े-बड़े यज्ञ किये थे तथा उनके फलस्वरूप श्रेष्ठ लोकोंका अधिकार प्राप्त किया था। उनकी रानियाँ और भाई अनुकूल थे, सारी पृथ्वी उनकी थी, वे जम्बूद्वीपके स्वामी थे और उनकी कीर्ति स्वर्गतक फैली हुई थी॥ ५॥

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