श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.40

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

मा कञ्चन शुचो राजन् यदीश्‍वरवशं जगत्।

लोकाः सपाला यस्येमे वहन्ति बलिमीशितुः।

स संयुनक्ति भूतानि स एव वियुनक्ति च॥ ४०

mā kañcana śuco rājan yadīśvaravaśaṃ jagat|

lokāḥ sapālā yasyeme vahanti balimīśituḥ|

sa saṃyunakti bhūtāni sa eva viyunakti ca|| 40

अर्थ

‘धर्मराज! तुम किसीके लिये शोक मत करो; क्योंकि यह सारा जगत् ईश्‍वरके वशमें है। सारे लोक और लोकपाल विवश होकर ईश्‍वरकी ही आज्ञाका पालन कर रहे हैं। वही एक प्राणीको दूसरेसे मिलाता है और वही उन्हें अलग करता है॥ ४०॥✎ 91

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #91 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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