श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.41

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

यथा गावो नसि प्रोतास्तन्त्यां बद्धाः स्वदामभिः।

वाक्तन्त्यां नामभिर्बद्धा वहन्ति बलिमीशितुः॥ ४१

yathā gāvo nasi protāstantyāṃ baddhāḥ svadāmabhiḥ|

vāktantyāṃ nāmabhirbaddhā vahanti balimīśituḥ|| 41

अर्थ

जैसे बैल बड़ी रस्सीमें बँधे और छोटी रस्सीसे नथे रहकर अपने स्वामीका भार ढोते हैं, उसी प्रकार मनुष्य भी वर्णाश्रमादि अनेक प्रकारके नामोंसे वेदरूप रस्सीमें बँधकर ईश्‍वरकी ही आज्ञाका अनुसरण करते हैं॥ ४१॥✎ 91

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #91 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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