जैसे बैल बड़ी रस्सीमें बँधे और छोटी रस्सीसे नथे रहकर अपने स्वामीका भार ढोते हैं, उसी प्रकार मनुष्य भी वर्णाश्रमादि अनेक प्रकारके नामोंसे वेदरूप रस्सीमें बँधकर ईश्वरकी ही आज्ञाका अनुसरण करते हैं॥ ४१॥✎ 91
यथा गावो नसि प्रोतास्तन्त्यां बद्धाः स्वदामभिः।
वाक्तन्त्यां नामभिर्बद्धा वहन्ति बलिमीशितुः॥ ४१
जैसे बैल बड़ी रस्सीमें बँधे और छोटी रस्सीसे नथे रहकर अपने स्वामीका भार ढोते हैं, उसी प्रकार मनुष्य भी वर्णाश्रमादि अनेक प्रकारके नामोंसे वेदरूप रस्सीमें बँधकर ईश्वरकी ही आज्ञाका अनुसरण करते हैं॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 144) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/13/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)