धार्मिकशिरोमणे! आप मुझे वह स्थान बतलाइये, जहाँ मैं आपकी आज्ञाका पालन करता हुआ स्थिर होकर रह सकूँ ॥ ३७॥
तन्मे धर्मभृतां श्रेष्ठ स्थानं निर्देष्टुमर्हसि।
यत्रैव नियतो वत्स्य आतिष्ठंस्तेऽनुशासनम्॥ ३७
धार्मिकशिरोमणे! आप मुझे वह स्थान बतलाइये, जहाँ मैं आपकी आज्ञाका पालन करता हुआ स्थिर होकर रह सकूँ ॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.17.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 167) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/17/37/