भगवान् श्रीकृष्णमें भक्ति होते ही, अनन्य प्रेमसे उनमें चित्त जोड़ते ही निष्काम ज्ञान और वैराग्यका आविर्भाव हो जाता है॥ ७॥✎ 25
वासुदेवे भगवति भक्तियोगः प्रयोजितः।
जनयत्याशु वैराग्यं ज्ञानं च यदहैतुकम्॥ ७
भगवान् श्रीकृष्णमें भक्ति होते ही, अनन्य प्रेमसे उनमें चित्त जोड़ते ही निष्काम ज्ञान और वैराग्यका आविर्भाव हो जाता है॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.2.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 85) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/2/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)