अदान्मे ज्ञानमैश्वर्यं स्वस्मिन् भावं च केशवः॥ ३९
imaṃ svanigamaṃ brahmannavetya madanuṣṭhitam|
adānme jñānamaiśvaryaṃ svasmin bhāvaṃ ca keśavaḥ|| 39
अर्थ
ब्रह्मन्! जब मैंने भगवान्की आज्ञाका इस प्रकार पालन किया, तब इस बातको जानकर भगवान् श्रीकृष्णने मुझे आत्मज्ञान, ऐश्वर्य और अपनी भावरूपा प्रेमाभक्तिका दान किया॥ ३९॥✎ 5354
इमं स्वनिगमं ब्रह्मन्नवेत्य मदनुष्ठितम्।
अदान्मे ज्ञानमैश्वर्यं स्वस्मिन् भावं च केशवः॥ ३९
ब्रह्मन्! जब मैंने भगवान्की आज्ञाका इस प्रकार पालन किया, तब इस बातको जानकर भगवान् श्रीकृष्णने मुझे आत्मज्ञान, ऐश्वर्य और अपनी भावरूपा प्रेमाभक्तिका दान किया॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 102) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/5/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)