श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.5.39

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इमं स्वनिगमं ब्रह्मन्‍नवेत्य मदनुष्ठितम्।

अदान्मे ज्ञानमैश्‍वर्यं स्वस्मिन् भावं च केशवः॥ ३९

imaṃ svanigamaṃ brahmannavetya madanuṣṭhitam|

adānme jñānamaiśvaryaṃ svasmin bhāvaṃ ca keśavaḥ|| 39

अर्थ

ब्रह्मन्! जब मैंने भगवान्‌की आज्ञाका इस प्रकार पालन किया, तब इस बातको जानकर भगवान् श्रीकृष्णने मुझे आत्मज्ञान, ऐश्‍वर्य और अपनी भावरूपा प्रेमाभक्तिका दान किया॥ ३९॥✎ 53 54

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #53 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #54 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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