॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.8.30
janma karma ca viśvātmannajasyākarturātmanaḥ|
tiryaṅnṝṣiṣu yādaḥsu tadatyantaviḍambanam|| 30
अर्थ
आप विश्वके आत्मा हैं, विश्वरूप हैं। न आप जन्म लेते हैं और न कर्म ही करते हैं। फिर भी पशु-पक्षी, मनुष्य, ऋषि, जलचर आदिमें आप जन्म लेते हैं और उन योनियोंके अनुरूप दिव्य कर्म भी करते हैं। यह आपकी लीला ही तो है॥ ३०॥
टिप्पणियाँ
- १
प्रा० पा०—नृष्वपि यादस्सु।