मार्गमें जिस समय घोड़ोंकी रास पकड़कर कंस रथ हाँक रहा था, उस समय आकाशवाणीने उसे सम्बोधन करके कहा—‘अरे मूर्ख! जिसको तू रथमें बैठाकर लिये जा रहा है, उसकी आठवें गर्भकी सन्तान तुझे मार डालेगी’॥ ३४॥✎ 8821651
पथि प्रग्रहिणं कंसमाभाष्याहाशरीरवाक्।
अस्यास्त्वामष्टमो गर्भो हन्ता यां वहसेऽबुध॥ ३४
मार्गमें जिस समय घोड़ोंकी रास पकड़कर कंस रथ हाँक रहा था, उस समय आकाशवाणीने उसे सम्बोधन करके कहा—‘अरे मूर्ख! जिसको तू रथमें बैठाकर लिये जा रहा है, उसकी आठवें गर्भकी सन्तान तुझे मार डालेगी’॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 123) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/1/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)