श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

पथि प्रग्रहिणं कंसमाभाष्याहाशरीरवाक्।

अस्यास्त्वामष्टमो गर्भो हन्ता यां वहसेऽबुध॥ ३४

pathi pragrahiṇaṃ kaṃsamābhāṣyāhāśarīravāk|

asyāstvāmaṣṭamo garbho hantā yāṃ vahase'budha|| 34

अर्थ

मार्गमें जिस समय घोड़ोंकी रास पकड़कर कंस रथ हाँक रहा था, उस समय आकाशवाणीने उसे सम्बोधन करके कहा—‘अरे मूर्ख! जिसको तू रथमें बैठाकर लिये जा रहा है, उसकी आठवें गर्भकी सन्तान तुझे मार डालेगी’॥ ३४॥✎ 882 1651

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #882 शब्दोंके बीचका स्थान: ३५॥वह → ३५॥ वह
  • #1651 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वस्त्रा-भूषणोंसे → वस्त्राभूषणोंसे

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