श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

इत्युक्तः स खलः पापो भोजानां कुलपांसनः।

भगिनीं हन्तुमारब्धः खड्गपाणिः कचेऽग्रहीत्॥ ३५

ityuktaḥ sa khalaḥ pāpo bhojānāṃ kulapāṃsanaḥ|

bhaginīṃ hantumārabdhaḥ khaḍgapāṇiḥ kace'grahīt|| 35

अर्थ

कंस बड़ा पापी था। उसकी दुष्टताकी सीमा नहीं थी। वह भोजवंशका कलंक ही था। आकाशवाणी सुनते ही उसने तलवार खींच ली और अपनी बहिनकी चोटी पकड़कर उसे मारनेके लिये तैयार हो गया॥ ३५॥✎ 882 1651

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #882 शब्दोंके बीचका स्थान: ३५॥वह → ३५॥ वह
  • #1651 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वस्त्रा-भूषणोंसे → वस्त्राभूषणोंसे

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