ये दोनों यक्ष वारुणी मदिराका पान करके मतवाले और श्रीमदसे अंधे हो रहे हैं। अपनी इन्द्रियोंके अधीन रहनेवाले इन स्त्री-लम्पट यक्षोंका अज्ञानजनित मद मैं चूर-चूर कर दूँगा॥ १९॥
तदहं मत्तयोर्माध्व्या वारुण्या श्रीमदान्धयोः।
तमोमदं हरिष्यामि स्त्रैणयोरजितात्मनोः॥ १९
ये दोनों यक्ष वारुणी मदिराका पान करके मतवाले और श्रीमदसे अंधे हो रहे हैं। अपनी इन्द्रियोंके अधीन रहनेवाले इन स्त्री-लम्पट यक्षोंका अज्ञानजनित मद मैं चूर-चूर कर दूँगा॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.10.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 192) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/10/19/