देखो तो सही, कितना अनर्थ है कि ये लोकपाल कुबेरके पुत्र होनेपर भी मदोन्मत्त होकर अचेत हो रहे हैं और इनको इस बातका भी पता नहीं है कि हम बिलकुल नंग-धड़ंग हैं॥ २०॥
यदिमौ लोकपालस्य पुत्रौ भूत्वा तमःप्लुतौ।
न विवाससमात्मानं विजानीतः सुदुर्मदौ॥ २०
देखो तो सही, कितना अनर्थ है कि ये लोकपाल कुबेरके पुत्र होनेपर भी मदोन्मत्त होकर अचेत हो रहे हैं और इनको इस बातका भी पता नहीं है कि हम बिलकुल नंग-धड़ंग हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.10.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 192) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/10/20/