यह विचार करके भगवान् श्रीकृष्ण दोनों वृक्षोंके बीचमें घुस गये†। वे तो दूसरी ओर निकल गये, परन्तु ऊखल टेढ़ा होकर अटक गया॥ २६॥
इत्यन्तरेणार्जुनयोः कृष्णस्तु यमयोर्ययौ।
आत्मनिर्वेशमात्रेण तिर्यग्गतमुलूखलम्॥ २६
यह विचार करके भगवान् श्रीकृष्ण दोनों वृक्षोंके बीचमें घुस गये। वे तो दूसरी ओर निकल गये, परन्तु ऊखल टेढ़ा होकर अटक गया॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.10.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 193) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/10/26/
टिप्पणियाँ
†
वृक्षोंके बीचमें जानेका आशय यह है कि भगवान् जिसके अन्तर्देशमें प्रवेश करते हैं, उसके जीवनमें क्लेशका लेश भी नहीं रहता। भीतर प्रवेश किये बिना दोनोंका एक साथ उद्धार भी कैसे होता।