श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

कृष्ण कृष्णारविन्दाक्ष तात एहि स्तनं पिब।

अलं विहारैः क्षुत्क्षान्तः क्रीडाश्रान्तोऽसि पुत्रक॥ १५

kṛṣṇa kṛṣṇāravindākṣa tāta ehi stanaṃ piba|

alaṃ vihāraiḥ kṣutkṣāntaḥ krīḍāśrānto'si putraka|| 15

अर्थ

वे जोर-जोरसे पुकारने लगीं—‘मेरे प्यारे कन्हैया! ओ कृष्ण! कमलनयन! श्यामसुन्दर! बेटा! आओ, अपनी माका दूध पी लो। खेलते-खेलते थक गये हो बेटा! अब बस करो। देखो तो सही, तुम भूखसे दुबले हो रहे हो॥ १५॥✎ 1413

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1413 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): माँका → माका

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