बेटा बलराम! व्रजराज भोजन करनेके लिये बैठ गये हैं; परन्तु अभीतक तुम्हारी बाट देख रहे हैं। आओ, अब हमें आनन्दित करो। बालको! अब तुमलोग भी अपने-अपने घर जाओ॥ १७॥✎ 1413
प्रतीक्षते त्वां दाशार्ह भोक्ष्यमाणो व्रजाधिपः।
एह्यावयोः प्रियं धेहि स्वगृहान् यात बालकाः॥ १७
बेटा बलराम! व्रजराज भोजन करनेके लिये बैठ गये हैं; परन्तु अभीतक तुम्हारी बाट देख रहे हैं। आओ, अब हमें आनन्दित करो। बालको! अब तुमलोग भी अपने-अपने घर जाओ॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 198) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)