श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

धूलिधूसरितांगस्त्वं पुत्र मज्जनमावह।

जन्मर्क्षमद्य भवतो विप्रेभ्यो देहि गाः शुचिः॥ १८

dhūlidhūsaritāṃgastvaṃ putra majjanamāvaha|

janmarkṣamadya bhavato viprebhyo dehi gāḥ śuciḥ|| 18

अर्थ

बेटा! देखो तो सही, तुम्हारा एक-एक अंग धूलसे लथपथ हो रहा है। आओ, जल्दीसे स्नान कर लो। आज तुम्हारा जन्म नक्षत्र है। पवित्र होकर ब्राह्मणोंको गोदान करो॥ १८॥✎ 1413

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1413 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): माँका → माका

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