श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

पश्य पश्य वयस्यांस्ते मातृमृष्टान् स्वलंकृतान्।

त्वं च स्नातः कृताहारो विहरस्व स्वलंकृतः॥ १९

paśya paśya vayasyāṃste mātṛmṛṣṭān svalaṃkṛtān|

tvaṃ ca snātaḥ kṛtāhāro viharasva svalaṃkṛtaḥ|| 19

अर्थ

देखो-देखो! तुम्हारे साथियोंको उनकी माताओंने नहला-धुलाकर, मींज-पोंछकर कैसे सुन्दर-सुन्दर गहने पहना दिये हैं। अब तुम भी नहा-धोकर, खा-पीकर, पहन-ओढ़कर तब खेलना’॥ १९॥✎ 1413

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1413 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): माँका → माका

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