॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.11.19
पश्य पश्य वयस्यांस्ते मातृमृष्टान् स्वलंकृतान्।
त्वं च स्नातः कृताहारो विहरस्व स्वलंकृतः॥ १९
paśya paśya vayasyāṃste mātṛmṛṣṭān svalaṃkṛtān|
tvaṃ ca snātaḥ kṛtāhāro viharasva svalaṃkṛtaḥ|| 19
अर्थ
देखो-देखो! तुम्हारे साथियोंको उनकी माताओंने नहला-धुलाकर, मींज-पोंछकर कैसे सुन्दर-सुन्दर गहने पहना दिये हैं। अब तुम भी नहा-धोकर, खा-पीकर, पहन-ओढ़कर तब खेलना’॥ १९॥✎ 1413