॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.11.29
तत्तत्राद्यैव यास्यामः शकटान् युङ्क्त मा चिरम्।
गोधनान्यग्रतो यान्तु भवतां यदि रोचते॥ २९
tattatrādyaiva yāsyāmaḥ śakaṭān yuṅkta mā ciram|
godhanānyagrato yāntu bhavatāṃ yadi rocate|| 29
अर्थ
सो यदि तुम सब लोगोंको यह बात जँचती हो तो आज ही हमलोग वहाँके लिये कूच कर दें। देर न करें, गाड़ी-छकड़े जोतें और पहले गायोंको, जो हमारी एकमात्र सम्पत्ति हैं, वहाँ भेज दें’॥ २९॥