उपनन्दकी बात सुनकर सभी गोपोंने एक स्वरसे कहा—‘बहुत ठीक, बहुत ठीक।’ इस विषयमें किसीका भी मतभेद न था। सब लोगोंने अपनी झुंड-की-झुंड गायें इकट्ठी कीं और छकड़ोंपर घरकी सब सामग्री लादकर वृन्दावनकी यात्रा की॥ ३०॥
तच्छ्रुत्वैकधियो गोपाः साधु साध्विति वादिनः।
व्रजान् स्वान् स्वान् समायुज्य ययू रूढपरिच्छदाः॥ ३०
उपनन्दकी बात सुनकर सभी गोपोंने एक स्वरसे कहा—‘बहुत ठीक, बहुत ठीक।’ इस विषयमें किसीका भी मतभेद न था। सब लोगोंने अपनी झुंड-की-झुंड गायें इकट्ठी कीं और छकड़ोंपर घरकी सब सामग्री लादकर वृन्दावनकी यात्रा की॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 199) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/30/