श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

अविदूरे व्रजभुवः सह गोपालदारकैः।

चारयामासतुर्वत्सान् नानाक्रीडापरिच्छदौ॥ ३८

avidūre vrajabhuvaḥ saha gopāladārakaiḥ|

cārayāmāsaturvatsān nānākrīḍāparicchadau|| 38

अर्थ

दूसरे ग्वालबालोंके साथ खेलनेके लिये बहुत-सी सामग्री लेकर वे घरसे निकल पड़ते और गोष्ठ (गायोंके रहनेके स्थान) के पास ही अपने बछड़ोंको चराते॥ ३८॥

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