श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

क्वचिद् वादयतो वेणुं क्षेपणैः क्षिपतः क्‍वचित्।

क्‍वचित् पादैः किंकिणीभिः क्‍वचित् कृत्रिमगोवृषैः॥ ३९

kvacid vādayato veṇuṃ kṣepaṇaiḥ kṣipataḥ kvacit|

kvacit pādaiḥ kiṃkiṇībhiḥ kvacit kṛtrimagovṛṣaiḥ|| 39

अर्थ

श्याम और राम कहीं बाँसुरी बजा रहे हैं, तो कहीं गुलेल या ढेलवाँससे ढेले या गोलियाँ फेंक रहे हैं। किसी समय अपने पैरोंके घुँघरूपर तान छेड़ रहे हैं तो कहीं बनावटी गाय और बैल बनकर खेल रहे हैं॥ ३९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें