॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.11.40
वृषायमाणौ नर्दन्तौ युयुधाते परस्परम्।
अनुकृत्य रुतैर्जन्तूंश्चेरतुः प्राकृतौ यथा॥ ४०
vṛṣāyamāṇau nardantau yuyudhāte parasparam|
anukṛtya rutairjantūṃśceratuḥ prākṛtau yathā|| 40
अर्थ
एक ओर देखिये तो साँड़ बन-बनकर हँकड़ते हुए आपसमें लड़ रहे हैं तो दूसरी ओर मोर, कोयल, बंदर आदि पशु-पक्षियोंकी बोलियाँ निकाल रहे हैं। परीक्षित्! इस प्रकार सर्वशक्तिमान् भगवान् साधारण बालकोंके समान खेलते रहते॥ ४०॥