श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.12.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तदद्भुतस्तोत्रसुवाद्यगीतिका-

जयादिनैकोत्सवमंगलस्वनान् ।

श्रुत्वा स्वधाम्‍नोऽन्त्यज आगतोऽचिराद्

दृष्ट्वा महीशस्य जगाम विस्मयम्॥ ३५

tadadbhutastotrasuvādyagītikā-

jayādinaikotsavamaṃgalasvanān |

śrutvā svadhāmno'ntyaja āgato'cirād

dṛṣṭvā mahīśasya jagāma vismayam|| 35

अर्थ

उन अद्भुत स्तुतियों, सुन्दर बाजों, मंगलमय गीतों, जय-जयकार और आनन्दोत्सवोंकी मंगलध्वनि ब्रह्मलोकके पास पहुँच गयी। जब ब्रह्माजीने वह ध्वनि सुनी, तब वे बहुत ही शीघ्र अपने वाहनपर चढ़कर वहाँ आये और भगवान् श्रीकृष्णकी यह महिमा देखकर आश्‍चर्य चकित हो गये॥ ३५॥✎ 1659

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1659 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ब्रह्म-लोकके → ब्रह्मलोकके

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