श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.12.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

विच्छायाभिः प्रधावन्तो गच्छन्तः साधुहंसकैः।

बकैरुपविशन्तश्‍च नृत्यन्तश्‍च कलापिभिः॥ ८

vicchāyābhiḥ pradhāvanto gacchantaḥ sādhuhaṃsakaiḥ|

bakairupaviśantaśca nṛtyantaśca kalāpibhiḥ|| 8

अर्थ

एक ओर कुछ ग्वालबाल आकाशमें उड़ते हुए पक्षियोंकी छायाके साथ दौड़ लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ हंसोंकी चालकी नकल करते हुए उनके साथ सुन्दर गतिसे चल रहे हैं । कोई बगुलेके पास उसीके समान आँखें मूँदकर बैठ रहे हैं, तो कोई मोरोंको नाचते देख उन्हींकी तरह नाच रहे हैं॥ ८॥✎ 1414 1415

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1414 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींका → छीका
  • #1415 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके, → छीके,

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