श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.12.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

विकर्षन्तः कीशवालानारोहन्तश्‍च तैर्द्रुमान्।

विकुर्वन्तश्‍च तैः साकं प्लवन्तश्‍च पलाशिषु॥ ९

vikarṣantaḥ kīśavālānārohantaśca tairdrumān|

vikurvantaśca taiḥ sākaṃ plavantaśca palāśiṣu|| 9

अर्थ

कोई-कोई बंदरोंकी पूँछ पकड़कर खींच रहे हैं, तो दूसरे उनके साथ इस पेड़से उस पेड़पर चढ़ रहे हैं। कोई-कोई उनके साथ मुँह बना रहे हैं, तो दूसरे उनके साथ एक डालसे दूसरी डालपर छलाँग मार रहे हैं॥ ९॥✎ 1414 1415

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1414 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींका → छीका
  • #1415 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके, → छीके,

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें