इस प्रकार सर्वात्मा श्रीकृष्ण बछड़े और ग्वालबालोंके बहाने गोपाल बनकर अपने बालकरूपसे वत्सरूपका पालन करते हुए एक वर्षतक वन और गोष्ठमें क्रीडा करते रहे॥ २७॥✎ 1927
इत्थमात्माऽऽत्मनाऽऽत्मानं वत्सपालमिषेण सः।
पालयन् वत्सपो वर्षं चिक्रीडे वनगोष्ठयोः॥ २७
इस प्रकार सर्वात्मा श्रीकृष्ण बछड़े और ग्वालबालोंके बहाने गोपाल बनकर अपने बालकरूपसे वत्सरूपका पालन करते हुए एक वर्षतक वन और गोष्ठमें क्रीडा करते रहे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 214) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1927 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): व्रज-वासियोंकी → व्रजवासियोंकी