श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

तथाघवदनान्मृत्यो रक्षित्वा वत्सपालकान्।

सरित्पुलिनमानीय भगवानिदमब्रवीत्॥ ४

tathāghavadanānmṛtyo rakṣitvā vatsapālakān|

saritpulinamānīya bhagavānidamabravīt|| 4

अर्थ

यह तो मैं तुमसे कह ही चुका हूँ कि भगवान् श्रीकृष्णने अपने साथी ग्वालबालोंको मृत्युरूप अघासुरके मुँहसे बचा लिया। इसके बाद वे उन्हें यमुनाके पुलिनपर ले आये और उनसे कहने लगे—॥ ४॥✎ 2066

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2066 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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