श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

श्रीवत्सांगददोरत्‍नकम्बुकंकणपाणयः ।

नूपुरैः कटकैर्भाताः कटिसूत्रांगुलीयकैः॥ ४८

śrīvatsāṃgadadoratnakambukaṃkaṇapāṇayaḥ |

nūpuraiḥ kaṭakairbhātāḥ kaṭisūtrāṃgulīyakaiḥ|| 48

अर्थ

उनके वक्षःस्थलपर सुवर्णकी सुनहली रेखा—श्रीवत्स, बाहुओंमें बाजूबंद, कलाइयोंमें शंखाकार रत्‍नोंसे जड़े कंगन, चरणोंमें नूपुर और कड़े, कमरमें करधनी तथा अँगुलियोंमें अँगूठियाँ जगमगा रही थीं॥ ४८॥✎ 1661

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1661 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भक्त-जनोंके → भक्तजनोंके

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