॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.13.48
श्रीवत्सांगददोरत्नकम्बुकंकणपाणयः ।
नूपुरैः कटकैर्भाताः कटिसूत्रांगुलीयकैः॥ ४८
śrīvatsāṃgadadoratnakambukaṃkaṇapāṇayaḥ |
nūpuraiḥ kaṭakairbhātāḥ kaṭisūtrāṃgulīyakaiḥ|| 48
अर्थ
उनके वक्षःस्थलपर सुवर्णकी सुनहली रेखा—श्रीवत्स, बाहुओंमें बाजूबंद, कलाइयोंमें शंखाकार रत्नोंसे जड़े कंगन, चरणोंमें नूपुर और कड़े, कमरमें करधनी तथा अँगुलियोंमें अँगूठियाँ जगमगा रही थीं॥ ४८॥✎ 1661