वे नखसे शिखतक समस्त अंगोंमें कोमल और नूतन तुलसीकी मालाएँ, जो उन्हें बड़े भाग्यशाली भक्तोंने पहनायी थीं, धारण किये हुए थे॥ ४९॥✎ 1661
आङ्घ्रिमस्तकमापूर्णास्तुलसीनवदामभिः।
कोमलैः सर्वगात्रेषु भूरिपुण्यवदर्पितैः॥ ४९
वे नखसे शिखतक समस्त अंगोंमें कोमल और नूतन तुलसीकी मालाएँ, जो उन्हें बड़े भाग्यशाली भक्तोंने पहनायी थीं, धारण किये हुए थे॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 217) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)