वे भगवान् श्रीकृष्णकी पहले देखी हुई महिमाका बार-बार स्मरण करते, उनके चरणोंपर गिरते और उठ-उठकर फिर-फिर गिर पड़ते। इसी प्रकार बहुत देरतक वे भगवान्के चरणोंमें ही पड़े रहे॥ ६३॥✎ 1662
उत्थायोत्थाय कृष्णस्य चिरस्य पादयोः पतन्।
आस्ते महित्वं प्राग्दृष्टं स्मृत्वा स्मृत्वा पुनः पुनः॥ ६३
वे भगवान् श्रीकृष्णकी पहले देखी हुई महिमाका बार-बार स्मरण करते, उनके चरणोंपर गिरते और उठ-उठकर फिर-फिर गिर पड़ते। इसी प्रकार बहुत देरतक वे भगवान्के चरणोंमें ही पड़े रहे॥ ६३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.63 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 219) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/63/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)