श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.14.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अनुजानीहि मां कृष्ण सर्वं त्वं वेत्सि सर्वदृक्।

त्वमेव जगतां नाथो जगदेतत्तवार्पितम्॥ ३९

anujānīhi māṃ kṛṣṇa sarvaṃ tvaṃ vetsi sarvadṛk|

tvameva jagatāṃ nātho jagadetattavārpitam|| 39

अर्थ

सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! आप सबके साक्षी हैं। इसलिये आप सब कुछ जानते हैं। आप समस्त जगत‍्के स्वामी हैं। यह सम्पूर्ण प्रपंच आपमें ही स्थित है। आपसे मैं और क्या कहूँ? अब आप मुझे स्वीकार कीजिये। मुझे अपने लोकमें जानेकी आज्ञा दीजिये॥ ३९॥✎ 1422 2072

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1422 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): राक्षसोंको → राक्षसोंके
  • #2072 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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