सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! आप सबके साक्षी हैं। इसलिये आप सब कुछ जानते हैं। आप समस्त जगत्के स्वामी हैं। यह सम्पूर्ण प्रपंच आपमें ही स्थित है। आपसे मैं और क्या कहूँ? अब आप मुझे स्वीकार कीजिये। मुझे अपने लोकमें जानेकी आज्ञा दीजिये॥ ३९॥✎ 14222072
अनुजानीहि मां कृष्ण सर्वं त्वं वेत्सि सर्वदृक्।
त्वमेव जगतां नाथो जगदेतत्तवार्पितम्॥ ३९
सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! आप सबके साक्षी हैं। इसलिये आप सब कुछ जानते हैं। आप समस्त जगत्के स्वामी हैं। यह सम्पूर्ण प्रपंच आपमें ही स्थित है। आपसे मैं और क्या कहूँ? अब आप मुझे स्वीकार कीजिये। मुझे अपने लोकमें जानेकी आज्ञा दीजिये॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.14.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 228) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/14/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1422 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): राक्षसोंको → राक्षसोंके