॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.14.43
एकस्मिन्नपि यातेऽब्दे प्राणेशं चान्तराऽऽत्मनः।
कृष्णमायाहता राजन् क्षणार्धं मेनिरेऽर्भकाः॥ ४३
ekasminnapi yāte'bde prāṇeśaṃ cāntarā''tmanaḥ|
kṛṣṇamāyāhatā rājan kṣaṇārdhaṃ menire'rbhakāḥ|| 43
अर्थ
परीक्षित्! अपने जीवनसर्वस्व—प्राणवल्लभ श्रीकृष्णके वियोगमें यद्यपि एक वर्ष बीत गया था, तथापि उन ग्वालबालोंको वह समय आधे क्षणके समान जान पड़ा। क्यों न हो, वे भगवान्की विश्व-विमोहिनी योगमायासे मोहित जो हो गये थे॥ ४३॥