परीक्षित्! होनहारके वश उन्हें इस बातका ध्यान ही नहीं रहा था। उस विषैले जलके पीते ही सब गौएँ और ग्वालबाल प्राणहीन होकर यमुनाजीके तटपर गिर पड़े॥ ४९॥✎ 2074
विषाम्भस्तदुपस्पृश्य दैवोपहतचेतसः।
निपेतुर्व्यसवः सर्वे सलिलान्ते कुरूद्वह॥ ४९
परीक्षित्! होनहारके वश उन्हें इस बातका ध्यान ही नहीं रहा था। उस विषैले जलके पीते ही सब गौएँ और ग्वालबाल प्राणहीन होकर यमुनाजीके तटपर गिर पड़े॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 237) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)