॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.16.19
अन्तर्ह्रदे भुजगभोगपरीतमारात्
कृष्णं निरीहमुपलभ्य जलाशयान्ते।
गोपांश्च मूढधिषणान् परितः पशूंश्च
संक्रन्दतः परमकश्मलमापुरार्ताः॥ १९
antarhrade bhujagabhogaparītamārāt
kṛṣṇaṃ nirīhamupalabhya jalāśayānte|
gopāṃśca mūḍhadhiṣaṇān paritaḥ paśūṃśca
saṃkrandataḥ paramakaśmalamāpurārtāḥ|| 19
अर्थ
उन्होंने दूरसे ही देखा कि कालियदहमें कालिय नागके शरीरसे बँधे हुए श्रीकृष्ण चेष्टाहीन हो रहे हैं। कुण्डके किनारेपर ग्वालबाल अचेत हुए पड़े हैं और गौएँ, बैल, बछड़े आदि बड़े आर्तस्वरसे डकरा रहे हैं। यह सब देखकर वे सब गोप अत्यन्त व्याकुल और अन्तमें मूर्च्छित हो गये॥ १९॥