श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.17.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तत्रैकदा जलचरं गरुडो भक्ष्यमीप्सितम्।

निवारितः सौभरिणा प्रसह्य क्षुधितोऽहरत्॥ ९

tatraikadā jalacaraṃ garuḍo bhakṣyamīpsitam|

nivāritaḥ saubhariṇā prasahya kṣudhito'harat|| 9

अर्थ

इसी स्थानपर एक दिन क्षुधातुर गरुडने तपस्वी सौभरिके मना करनेपर भी अपने अभीष्ट भक्ष्य मत्स्यको बलपूर्वक पकड़कर खा लिया॥ ९॥

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